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Pulkit Agrawal, Poetry

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Pulkit Agrawal

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मेरा शत्रु मै स्वयं ही हूं, और मेरा ये अंतर्मन | Building a space for stories, art & people @kalamanch_studio

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Shayari, kavita & stories (3)

Kavita / Poetry · Hindi

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याद तुम्हारी आती है

सावन की हर बारिश में, जब बिजलियां तड़तड़ती है, उस समय अकेलेपन में, मुझे याद तुम्हारी आती है | टप टप बारिश की बूंदे जब, मेरे कानों में आती है, उस समय अकेलेपन में, मुझे याद तुम्हारी आती है | पहली बारिश की भीगी मिट्टी, जब भी खुशबू में खाती है, उस समय अकेलेपन में, मुझे याद तुम्हारी आती है | छम छम बारिश के रोग में जब मोरनी नाचे आती है, उस समय अकेलेपन में, मुझे याद तुम्हारी आती है | जब भी यह बारिश आती है, यह ताना में कर जाती है, उस समय अकेलेपन में, मुझे याद तुम्हारी आती है |

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Kavita / Poetry · Hindi

उसको भूलने का

ढूंढा हर तरीका उसको भूलने का, फिर हर तरीके से भूल आया उसको भूलने का | हर रोज आती है हर रोज सताती है, उसकी याद में ही भूल आया उसको भूलने का | न चाहता हु कुछ न मांगता हु कुछ, हर दुआओं में भूल आया हुस्को भूलने का | घुमा हर शहर हर एक गली-गली, उसकी गली में भूल आया उसको भूलने का | निकले जहा से वो गुल ए बहार की खुशबू, उसकी मदहोसी में भूल आया उसको भूलने का | भूल से भी भूल में मैं उसको भूA लता नहीं, खुदको भूलकरके भूल आया उसको भूलने का |

Kavita / Poetry · Hindi

हर मौसम बरसात मिले

ऐसा तो संभव ही नहीं, की हर मौसम बरसात मिले, अपने मन की धूप मिले और अपने मन की छांव मिले | जितना भी चाहे मधुर शहद हो, नमक चाट के जाना होगा, अपने जीवन के कास्ट्तों को भी तुझको गले लगाना होगा | यदि अपनी बगिया के फूलों से तूने खुद को महकाया है, तेरे हिस्से के सूलो को भी तुझको ही तोः बोना होगा | जब मंजिल का आनंद तुझे घनघोर प्रशंसा देता है, तो राहो की ठोकर से भी तुझको हाथ मिलाकर चलना होगा | तुझको अगर निखरना है तो सूरज जैसा तपना होगा, माला फूलों की बनना है तो सुई धागों में पीरना होगा |

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